Sunday, March 2, 2025

थका मन (Thaka Man)

थका मन (Thaka Man)

कभी-कभी
थक जाता है
मन भी तन के साथ,
तब बस निढाल हो,
एक कोने में,
किसी से बिना कुछ कहे,
चला जाता है,
आँखें बंद किए
शून्य की ओर...!

फोटो : सनियारा बुगियाल, रांसी

1 comment:

  1. आपकी ये कुछ लाइन्स पढ़कर ऐसा लगा जैसे खुद की ही भावनाओं को पढ़ लिया हो। कभी-कभी सच में मन और तन दोनों इतना थक जाते हैं कि बस सबकुछ छोड़कर खुद में ही खो जाने का मन करता है। किसी से कुछ कहे बिना, सिर्फ आँखें बंद करके किसी खाली जगह या शून्य की ओर खुद को भेज देना, ये अनुभव हम सब ने कहीं न कहीं महसूस किया है।

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