Friday, August 4, 2017

देवी पद्मावती मंदिर (तिरुपति) यात्रा और दर्शन

देवी पद्मावती मंदिर (तिरुपति) यात्रा और दर्शन



तिरुमला की सप्तगिरि पहाड़ियों में स्थित भगवान् वेंकटेश के दर्शन के उपरांत हम कल ही तिरुमला से तिरुपति आ गए थे और आज हमें तिरुपति से चेन्नई होते हुए रामेश्वरम जाना था। हमारी ट्रेन दिन में 10 बजे थी और प्लान तो यही था कि सुबह सुबह तिरुपति शहर में एक दो घंटे घूमने के बाद निर्धारित समय पर स्टेशन पहुंचना है, पर एक मित्र के सुझाव के अनुसार मुझे अपनी योजना बदलनी पड़ी। अब हम तिरुपति के बाज़ारों में भटकने के बजाय देवी पद्मावती के दर्शन के लिए जाना था। वैसे तो पद्मावती मंदिर के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी थी कि ये मंदिर तिरुपति में स्थित है पर यहाँ कैसे जाएं और जाने के बाद कितना टाइम लगेगा ये सब पता नहीं होने के कारण मैंने इसे अपनी योजना में शामिल नहीं किया था। कभी कभी बिना सोचे हुए भी कुछ हो जाता है और यही मेरे साथ हुआ। कल रात में एक मित्र नरेंद्र शोलेकर ने मुझे पद्मावती मंदिर और वहां जाने के बारे में बताया और मैं वहां जाने को झट तैयार हो गया। शायद उनका मार्गदर्शन न होता तो शायद इस मंदिर के दर्शन से मैं वंचित रह जाता। 


पद्मावती मंदिर जाने के लिए मुझे वहां 5 बजे तक पहुंच जाना जरूरी था अन्यथा हमें वहां जाकर भी दर्शन से वंचित होने पड़ता और ऐसा तो मैं किसी हालत में नहीं होने देना चाहता था। रात में सोते समय मैंने मोबाइल में 3:30 बजे का अलार्म लगाया था कि एक घंटे में तैयार होकर गेस्ट हाउस से निकल जाएंगे और 5 बजे तक मंदिर पहुंच जाएंगे। रात में 10 से 11 के बीच सोया होगा और एक मित्र (प्रतीक गांधी) का फ़ोन आया और नेटवर्क की समस्या के कारण बात तो नहीं सकी पर हमारी आँखों से नींद जाती रही और बहुत सोने की कोशिश किया पर सो नहीं सका। अब आप ये मत समझ लीजियेगा कि फ़ोन आने से मेरी नींद ख़राब हुई, नींद ख़राब होने की वजह 2 दिन पहले चेन्नई से तिरुपति आते हुए रास्ते में जो घटना घटित हुई थी वो बार बार न चाहते हुए भी मुझे दिखाई दे रहा था। एक बार फिर मुझे उसी रास्ते से और उसी ट्रेन से जाना था और संयोग ये था कि कोच और सीट भी बिलकुल वही था जो आने के समय मिला था इसलिए मन और ज्यादा उद्विग्न हो रहा था। जागते हुए भी मैं परिवार को ये अहसास नहीं होने देना चाहता था कि मुझे नींद नहीं आ रही क्योंकि एक तो मैं जाग रहा हूं और साथ में सबको जगा देना अच्छा नहीं था। खैर बहुत कोशिश के बाद भी नींद नहीं आयी और देखते देखते 3 बज गए।





अब मैं उठकर कमरे में ही चहलकदमी करने लगा था। कुछ देर यूँ ही घूमने के बाद मैंने अब सबको जगाना उचित समझा। एक एक करके सबको जगाया। फिर बारी बारी से नहा कर तैयार हुए और निकल पड़े पद्मावती मंदिर के लिए।  घडी देखा तो करीब 4:30 बज चुके थे। गेस्ट हाउस से बाहर आए तो कुछ ऑटो वाले वहीं गेट पर ही खड़े मिल गए। कुछ बसें भी खड़ी थी जो तिरुमला जा रही थी पर मुझे तो पद्मावती मंदिर जाना था। एक ऑटो वाले से बात हुई तो पहले उसने 150 रुपए माँगा फिर खुद ही 100 रुपये में जाने के लिए तैयार हो गया और 100 रुपए में इतने मुझे ये सौदा बुरा नहीं लगा और हम लोग ऑटो में बैठ गए। सुबह का समय था ऑटो स्टार्ट होने में नखरे दिखा रही थी और ड्राइवर ने जब जोर से लताड़ लगाई तो फिर फुर्रररररररर से स्टार्ट हो गई और चल पड़ी मंज़िल की तरफ। विष्णु निवासम या दूसरे तरीके से कहें तो स्टेशन से पद्मावती मंदिर का रास्ता बिलकुल सुनसान इलाके से होकर गुजरता है। रात के समय अनजान जगह पर ऐसे इलाके से गुजरते हुए डर भी लग रहा था पर कुछ दूर आगे पीछे चल रहे दूसरे गाड़ी वाले या फिर विपरीत दिशा से आती हुई को गाड़ी को देखकर ये अहसास हो जाता था कि हम सही रास्ते पर जा रहे है और डरने वाली कोई बात नहीं है। करीब 20 मिनट के सफर के बाद हम पद्मावती मंदिर पहुंच गए। 

गंतव्य तक पहुंच कर ऑटो वाले को 100 रुपये दिया और मंदिर की तरफ बढ़े। यहाँ प्रवेश द्वार पर ही कुछ फूल बेचने वाले बैठे हुए थे और 4-5 फूलवालों ने घेर लिए कि हमसे ले लीजिये, हमसे ले लीजिए। यहाँ केवल कमल के फूल ही मिलते है जो देवी लक्ष्मी को प्रिय है। हमने भी सबके लिए एक सफ़ेद और एक गुलाबी रंग का कमल खरीदा और वहीं फूलवाले के पास चप्पल रखकर अंदर गए।  दरवाजे के पास ही दाहिने तरफ मोबाइल फ़ोन और कैमरा रखने का काउंटर बना हुआ है और वहीं सामने दर्शन टोकन का काउंटर है। एक लाइन में पिताजी और दूसरी लाइन में पत्नी को खड़ा करके हम मोबाइल और कैमरा रखने चले गए। कैमरा रखकर आये तब तक काउंटर खुल चुका था। 25 रूपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से 5 दर्शन पर्ची खरीदने के बाद हम सब दर्शन के लिए लगे हुए लाइन में खड़े हो गए। अब तक 5:15 बज चुके थे। करीब  5:30 बजे दर्शन आरम्भ हो गया। अब एक एक करके लोग आगे बढ़ते जा रहे थे। जहाँ हम लाइन में खड़े हुए थे वहां से मंदिर के गर्भ गृह तक पहुंचने के बीच 3 जगह लोगो की तलाशी ली गई और इस तलाशी में कई लोग मोबाइल और कैमरा ले जाते हुए पकड़े गए। जिन लोगों के पास कैमरा या मोबाइल या कोई भी इलक्ट्रोनिक सामान मिलता उसे दर्शन लाइन से निकाल दिया जा रहा था। धीरे धीरे दर्शन की लाइन आगे बढ़ती रही और 6:00 बजे तक हमने दर्शन कर लिया। यहाँ भगवन वेंकटेश्वर मंदिर की तरह भीड़ नहीं थी इसलिए यहाँ हमने बहुत आराम से दर्शन किया और हाथ जोड़े। दर्शन करने वाले हर व्यक्ति को वहां खड़े पण्डे एक छोटी से पुड़िया दे रहे थे जिसमें सिंदूर और फूल की एक-दो पखुड़ियां थी। 





दर्शन करने के बाद हम कुछ देर मंदिर में गुजारने के बाद हम करीब 6:30 बजे मंदिर से बाहर आये तब तक टिकट काउंटर बंद हो चुका था। अब मंदिर में देवी के दर्शन 7 बजे के बाद होने वाले थे। खैर मैंने तो दर्शन कर लिया। मंदिर से बाहर निकल कर हमने कुछ फोटो लिए फिर वहीं खड़े बस से जो तिरुपति रेलवे स्टेशन जा रही थी, उसी में बैठ गए। मंदिर के पास से रेलवे स्टेशन से बस का किराया 10 रूपये प्रति सवारी है। हमने भी कंडक्टर को 5 लोगों के 50 रुपये दिया और करीब 7 बजे हम तिरुपति स्टेशन पहुँच गए। यहाँ पहुंचकर माँ, पिताजी और पत्नी गेस्ट हाउस में चले गए और मैं बेटे के साथ तिरुपति रेलवे स्टेशन और बाज़ार का फोटो लेने लगा। परसो जब हम तिरुपति पहुंचे थे तो रात होने के कारण इस जगह को ठीक से देख नहीं सके थे, पर आज इसे देखने का मेरे पास पूरा मौका था। तिरुपति स्टेशन को देखकर नहीं लगता कि ये कोई रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन की बनावट एक बड़े मंदिर की तरह है। पूरा स्टेशन ही मन्दिर की शक्ल में है और यहाँ ये कहना ही ठीक रहेगा कि इस स्टेशन पर भी भगवान वेंकटेश्वर का भक्ति का रंग चढ़ा हुआ है और भला हो भी क्यों नहीं क्योंकि इस शहर की पहचान ही भगवन वेंकटेश के कारण है। कुछ फोटो खींचने और कुछ इधर उधर घूमने के बाद हम भी गेस्ट हाउस आ गए और तब तक माँ और कंचन मिलकर सारा सामान पैक कर चुके थे। 

तिरुपति से चेन्नई वाली हमारी ट्रेन 10 बजे थी और अभी 8 बज थे। गेस्ट हाउस में खाने का पता किया तो खाना मिलने का समय 10 बजे था और 10 बजे तो हमारी ट्रेन थी इसलिए हम खाना खाने के लिए बाहर निकले और एक होटल में पहुंच गए। होटल वाले ने मेनू कार्ड दिया जिस पर लिखे डिश तो मेरे समझ में ही नहीं आये तो हमने एक जाना पहचाना नाम जिसे डोसा कहते हैं, वही ऑर्डर कर दिया। कुछ देर के इंतज़ार के बाद 5 प्लेट में डोसा हम सबके सामने था। एक प्लेट में केले के पत्ते पर सबके लिए खाना लगाया जा रहा था। गांव में जब कोई शादी-विवाह होता है तो आज भी पत्तल पर खाने के लिए मिलता है और केले के पत्ते पर खाना खाकर वही पत्तल याद आ रहा था। वैसे यहाँ के डोसे का स्वाद का कोई जवाब नहीं था, कीमत दिल्ली वाले डोसे से आधा था और स्वाद में दुगुना था। खाना खा चुकने के पश्चात हम बिल का पेमेंट करके सीधे गेस्ट हो आ गए। इतना सब कुछ करते हुए अब तक 9:30 बज चुके थे और हमें अब यहाँ से विदा होने का समय भी हो चुका था, तो हम लेते हैं आपसे विदा और जल्दी ही मिलते हैं।




श्री पद्मावती मंदिर के बारे में 

पद्मावती का अर्थ है भगवान विष्णु की पत्नी। भगवान् विष्णु के अन्य मंदिरों में विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमाएं साथ साथ मिलती है लेकिन यहाँ दोनों के अलग अलग मंदिर हैं। भगवान वेंकटेश्वर (भगवान विष्णु) का मंदिर तिरुपति से करीब 20 किलोमीटर दूर तिरुमला की पहाड़ियों में है और देवी लक्ष्मी (पद्मावती) का मंदिर तिरुपति से ही दूसरी तरफ तिरुपति से पांच किलोमीटर दूर तिरुचनूर मार्ग पर स्थित है। कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति भगवान वेंकटेश्वर और देवी पद्मावती दोनों के दर्शन नहीं करता है उसकी यात्रा अधूरी मानी जाती है। पद्मावती देवी का मंदिर भी भगवान वेंकटेश्वर मंदिर और दक्षिण के अन्य मंदिरों की तरह द्रविड शैली में बना है। मंदिर में देवी की चांदी की विशाल मूर्ति है। देवी पद्मासन में बैठी हैं। उनके दो हाथों में कमल का पुष्प है। एक पुष्प अभय का प्रतीक है तो दूसरा पुष्प वरदान का है और शायद इलसिए जब मैं मंदिर में चढाने के लिए फूल खरीद रहा था तो फूल वाले ने मुझे दो फूल दिए थे। मंदिर में देवी का श्रृंगार सोने से किया गया है। बालाजी की पत्नी पद्मावती के बारे में कहा जाता है कि वे 12 सालों तक पाताल लोक में वास कर रही थीं। 13वें साल में माता पद्मावती धरती पर अवतरित हुईं। कार्तिक शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि को देवी का अवतरण हुआ।

कैसे पहुंचे : तिरुपति सड़क और रेलमार्ग द्वारा देश के सभी शहरों से जुड़ा है। देश के बड़े शहरों से तिरुपति तक पहुँचने के लिए सीधी रेल सेवा है। इसके अलावा जिन शहरों से तिरुपति तक रेल सेवा नहीं है वो चेन्नई होते हुए तिरुपति जा  सकते हैं। चेन्नई से तिरुपति की दूरी करीब 150 किलोमीटर है। चेन्नई से तिरुपति जाने के लिए बसें भी बहुतयात में उपलब्ध है। तिरुपति पहुंचने के बाद तिरुपति रेलवे स्टेशन से मंदिर जाने के लिए बहुतायत में बसें मिलती है और आप चाहे तो ऑटो से भी जा सकते हैं।  तिरुपति रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी 5 किलोमीटर ही है जिसे पूरा करने में लगभग 20 से 25 मिनट का समय लगता है। 

कहाँ ठहरे : तिरुपति में ठहरने के लिए प्राइवेट होटल और गेस्ट हॉउस की कोई कमी नहीं है। यहाँ हर बजट के लिए लोगों के रहने के लिए आसानी से कमरे मिल जाते हैं। इनमें सबसे सुविधाजनक तिरुमला-तिरुपति देवसंस्थानम द्वारा संचालित गेस्ट हाउस माधवन, शिव निवासम और विष्णु निवासम है। इन तीनों में विष्णु निवासम रेलवे स्टेशन के सामने ही स्थित है। इनकी बुकिंग पहले ही तिरुमला-तिरुपति देवसंस्थानम (TTD) के वेबसाइट https://ttdsevaonline.com से की जा सकती है अन्यथा बाद में यहाँ कमरा मिलना मुश्किल हो जाता है। 

मंदिर में दर्शन : पद्मावती मंदिर में दर्शन सुबह 5 बजे ही आरम्भ हो जाता है जो हर दिन के हिसाब से अलग अलग होता है और मुर्हूत के अनुसार कुछ 10-20 मिनट आगे पीछे होता है। यह मंदिर मुर्हूत के अनुसार पूरे दिन में कई बार दर्शन के लिए खुलता और बंद होता है।  कभी कभी तो दर्शन करने में कई घंटे का समय लग जाता है और इस मामले में हम भागयशाली रहे कि कुछ ही मिनटों में हमें दर्शन हो गए। यहाँ दर्शन  25 रूपये का एक कूपन लेना पड़ता है जिसके लिए मंदिर के मुख्य द्वार पर ही कई काउंटर हैं। ये काउंटर भी दर्शनों के समय के अनुसार ही खुलता और बंद होता है। 


इस यात्रा के अन्य भाग भी अवश्य पढ़ें  




आइये अब इस यात्रा के कुछ फोटो देखते हैं :



तिरुपति रेलवे स्टेशन 

तिरुमला में 

तिरुमला से तिरुपति के रास्ते में कहीं 

तिरुमला से तिरुपति की घुमावदार सड़कें 

तिरुमला से तिरुपति के रास्ते में कहीं

तिरुमला से तिरुपति के रास्ते में कहीं

तिरुमला पर्वत से तिरुपति शहर का एक दृश्य 

तिरुमला पर्वत से तिरुपति शहर का एक दृश्य

तिरुमला से तिरुपति के रास्ते में कहीं

तिरुमला से तिरुपति के रास्ते में कहीं

तिरुपति शहर में किसी जगह 

रास्ते का मार्गदर्शन 

तिरुपति शहर में किसी जगह (आजकल केबल वायर के कारण हर चीज़ की खूबसूरती ख़राब हो गई है )

पद्मावती मंदिर का अधूरा दृश्य 

पद्मावती मंदिर का दर्शन पर्ची काउंटर 

पद्मावती मंदिर के बाहर फूल की बिक्री 

पद्मावती मंदिर के पास 

पद्मावती मंदिर में कैमरा और मोबाइल डिपॉजिट केंद्र 

पद्मावती मंदिर के बाहर सड़क 

तिरुपति रेलवे स्टेशन 

कुछ जरूरी चीज़ों का मार्गदर्शन 

कुछ जरूरी चीज़ों का मार्गदर्शन

तिरुपति रेलवे स्टेशन

तिरुपति रेलवे स्टेशन

तिरुपति रेलवे स्टेशन

तिरुपति रेलवे स्टेशन के बाहर 

तिरुपति रेलवे स्टेशन

विष्णु निवासम से रेलवे स्टेशन जाने वाला रास्ता (पैदल पार पथ)

पद्मावती मंदिर 

विष्णु निवासम से दिखाई देता तिरुमला की पहाड़ियां 

विष्णु निवासम से दिखाई देता तिरुमला की पहाड़ियां

विष्णु निवासम के हर कमरे में ऐसी ही भगवान वेंकटेश और पद्मावती देवी की प्रतिमाएं लगी हैं 


इस यात्रा के अन्य भाग भी अवश्य पढ़ें  



16 comments:

  1. बहुत सुंदर यात्रा। यहां पर कमल के फूल मिलते है,,, जो लक्ष्मी प्रिय है। फोटो अच्छे आए है।

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद सचिन भाई जी, आते रहिएगा ब्लॉग पर

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  2. बहुत सुंदर,एक एक चीज की विस्तार से जानकारी दी गयी है ।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद और अभिनन्दन महेश जी, आते रहिएगा ब्लॉग पर

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  3. सिन्हा भाई के ब्लॉग पर आ कर मन प्रसन्न हो जाता है। आज के लेख में आपने जो मंदिर दिखाया हमने अपनी यात्रा में तो यह नहीं देखा था। दोबारा जाने का यहां विचार फिलहाल तो नहीं है लेकिन कहते हैं भगवान बुलाएगा तो चले जाएंगे। जाएंगे तो इसके दर्शन भी करेंगे।
    स्टेशन काफी बदला बदला सा लगता है।

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    1. धन्यवाद संदीप भाई जी, मेरे ब्लॉग को पढ़कर जितना प्रसन्न आप हुए उससे ज्यादा प्रसन्नता मुझे आपकी इन बातों से होती है, और संदीप भाई जी यदि नरेंद्र भाई का मार्गदर्शन नहीं मिलता तो ये मंदिर भी मैं नहीं देख पाता , इसके लिए हम उनके आभारी हैं, स्टेशन को बहार से देखकर तो यही लगता है कि ये एक मंदिर है।

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  4. बहुत सुंदर जानकारी सहित ....
    हम भी नही जा पायें थे ...
    भविष्य में ज़रूर दर्शन करेंगे ...
    दक्षिण भारत मेरा मनपसंद स्थान है .ii

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    1. धन्यवाद संतोष भाई जी, आप नहीं जा पाए तो क्या हुआ, अगली बार कभी चले जायेगें, और जब बुलावा आएगा तो अपने आप जायेगे, मैं भी नहीं जाता और जाने की कोई योजना भी नहीं थे, सब कुछ अचानक हुआ नरेंद्र भाई के मार्गदर्शन से।

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  5. बहुत ही डिटेल् में एक एक जानकारी...रात में जिसका फोन आया वो में था और आपकी नींद भगाने के लिए माफ़ी...मजा आ गया इतनी जानकारी पढ़ कर

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका। हाँ रात में जिनका फ़ोन आया वो आप ही थे, पर नींद आपने नहीं भगाया, और उसके लिए माफी नहीं मांगे

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  6. एक हिन्दी भाषी व्यक्ति के लिए दक्षिण भारत की यात्रा करना और वहाँ के बारे में जानकारियां जुटाना बहुत ही श्रमसाध्य कार्य है। आपने बहुत बड़ा काम किया।

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    1. ब्रजेश भाई जी आपने इतना बड़ा सम्मान दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद और अभिनंदन आपका। संवाद बनाये रखियेगा और आते रहिएगा ब्लॉग पर

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  7. तिरुपति रेलवे स्टेशन सच में हमारे यहाँ के स्टेशनो से अलग और अच्छा लग रहा है। बहुत बढ़िया यात्रा वृतांत ..

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद गौरव जी, हाँ स्टेशन बहुत बढ़िया बना हुआ है।

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  8. बहुत बढ़िया अभय भाई.... आपके ब्लॉग पर लेख पढ़कर और जानकारियां अपने मन संचित करके अच्छा लगा |

    पद्मावती मंदिर के दर्शन करना ये आपके लिए अलग ही उपलब्धी रही ....

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका जो आपने अपना समय दिया , जानकारियां देना अब जरूरी लगने लगा है केवल अपनी कहानी बताने से अच्छा है कि कुछ जानकारियां भी दी जाये तभी तो पढ़ने वाले को कुछ हासिल होगा ,

      पद्मावती मंदिर के दर्शन करना मेरी इस यात्रा की एक खास उपलब्धि रही जो मेरी योजना में नहीं होते हुए भी पूरा हुआ

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