Monday, June 19, 2017

मुगल गार्डन, दिल्ली (Mughal Garden, Delhi)

मुगल गार्डन, दिल्ली (Mughal Garden, Delhi)

12 मार्च 2017
इस साल मुझे दूसरी बार मुग़ल गार्डन जाने का मौका मिला। पहली बार मुग़ल गार्डन फरवरी 2015 में गया था और आज 2 साल बाद एक बार फिर वहां जाने जाने का मौका मिला।  मुग़ल गार्डन राष्ट्रपति भवन के पीछे के भाग में स्थित है। यहाँ जितने प्रकार के फूलों प्रजातियां है शायद देश के किसी भी उद्यान में फूलों की  इतनी प्रजातियां नहीं होगी, और हो भी क्यों नहीं आखिर इतने बड़े देश के राष्ट्रपति (राजा) का बगीचा जो है। बसंत के मौसम में इस गार्डन की सुंदरता अपने शबाब पर होती है, और यही वो समय होता है  जब इसे आम लोगों के लिए खोला जाता है। वैसे यहाँ आम लोगों के लिए साल में 11 महीने प्रवेश निषिद्ध है पर साल में एक महीने मध्य फरवरी से मध्य मार्च तक (दो चार दिन आगे पीछे) मुग़ल गार्डन पूरे देश के नागरिकों के लिए खुला रहता है।


इस बार होली की लगातार 3 छुट्टियां पड़ रही थी। 12 मार्च को रविवार और होलिकादहन, 13 मार्च को होली और लगे हाथ ऑफिस की तरफ से 14 मार्च की भी छुट्टी दे  दी गयी थी। 3 लगातार छुट्टी पड़ने पर कहीं बाहर का भी प्लान बन सकता था पर होली के कारण वो संभव नहीं था। 11 मार्च को मैं ऑफिस से जाने के बाद ऐसे ही अख़बार पलट रहा था तो एक समाचार पर नज़र पड़ी, जिसमें लिखा था, "कल मुग़ल गार्डन जाने का अंतिम मौका" और इसका मतलब साफ था कि कल के बाद मुग़ल गार्डन 11 महीने के लिए बंद कर दिया जायेगा। अब तक कंचन गरमागरम चाय ले आयी थी। चाय पीते हुए मैंने कंचन से कल मुग़ल गार्डन चलने के लिए पूछा तो पहले तो उन्होंने मना किया कि कल त्यौहार है और यदि कहीं बाहर चली गयी तो कब सारा काम करूंगी। हमने उनसे कहा कि मुग़ल गार्डन करीब 9 बजे खुल जाता है और हम लोग यहाँ से 8 बजे निकल जायेंगे और 1 बजते बजते वापस आ जाएंगे। इस बात पर वो चलने के लिए तैयार हो गयी। बेटे ने तो अपने सभी दोस्तों को बताना भी शुरू कर दिया था कि मैं कल मुग़ल गार्डन जाऊंगा। 


अगली सुबह हम लोग जल्दी ही उठे और तैयार होकर 8 बजे से पहले ही घर से निकल लिए। घर से मुख्य सड़क तक पैदल ही आये। यहाँ एक ऑटो वाले को मुग़ल गार्डन चलने के लिए पूछा तो वो नखरे दिखाने लगा कि यहाँ उतार देंगे, उस रास्ते से नहीं जायेगे आदि आदि। मैंने उसे कहा कि केवल हाँ या नहीं में जवाब दे देते तो ज्यादा बढ़िया रहता। मैं उससे बात कर ही रहा था कि दूसरा ऑटो वाला वहां कर रुका और मेरे पूछने पर उसने 250 रुपए बोला। मैंने उसे कहा कि भाई 250 रुपए बहुत ज्यादा है  तो उसका जवाब मिला कि एक दाम 200 रुपए। मैं उसे ये कहते हुए बस स्टॉप की तरह बढ़ गया कि 100 रूपये में आपको चलना है तो चलिए नहीं तो 3 लोगों के 10 रूपये के हिसाब से 30 रुपए में बस से चले जाएंगे। अब ग्राहक को हाथ से जाता देखकर वो 150 रूपये में चलने के लिए तैयार हुआ और अंततः 100 रुपए में ही चलने के लिए तैयार हुआ। हम ऑटो में बैठ गए और करीब 30 मिनट बाद 9 बजे मुग़ल गार्डन पहुंच गए और इतनी जल्दी पहुंचने का एक ही कारण था कि आज सड़कें खाली मिली नहीं तो अमूमन इतनी दूर के सफर में करीब 50 मिनट या घंटा भर भी लग जाता है।

पिछले बार जब हम मुग़ल गार्डन गए थे तो कैमरा और मोबाइल ले जाना मना था और उसे बाहर ही जमा करवाना पड़ता था और इसी प्रक्रिया में घंटा भर का समय लग जाता था इसलिए इस बार हम न तो कैमरा और न ही मोबाइल ले गए। पर यहाँ पहुँचते ही एक झटका लगा क्योंकि इस बार कैमरा तो अंदर ले जाना मना था लेकिन मोबाइल पर कोई पाबन्दी नहीं थी। खैर अब कर भी क्या सकते थे।  यहाँ से वापस घर जाकर मोबाइल लाना मुझे उचित नहीं लगा और हम सब लाइन में लग गए।  सुरक्षा जांच के बाद एक बार फिर से हम उस खूबसूरत गार्डन में दाखिल हो चुके थे, जहाँ 2 साल पहले आये थे।  इन 2 सालों में यहाँ तिनका भर भी कोई बदलवाब नहीं हुआ था। अब तक 9 :30 बज चुके थे। अंदर घुसते ही सबसे पहले संगीतमय फव्वारे का दर्शन हुआ। थोड़ा आगे बड़े तो यहाँ की खूबसूरत छटा आखों के सामने थी। भांति भांति के फूल, तरह तरह के पौधे आने वाले लोगों स्वागत कर रहे थे। रंग बिरंगे फूल और फूलों पर मंडराती तितलियाँ बहुत ही सुन्दर लग रही थी। इतने प्रकार के फूलों की खुशबू मिलकर समूचे वातावरण को सुगन्धित कर रहे थे। कुछ लोग अपने अपने मोबाइल से फोटो लेने और वीडियो बहाने में व्यस्त थे और हम इन नज़ारों को आँखों के के रास्ते से अपने दिल में उतार रहे थे।  मोबाइल का क्या खो गया या ख़राब हुआ तो गया, पर मेरे दिल में जो छवि इक्ट्ठा हो रही थी वो कभी डिलीट या ख़राब होने वाला नहीं था। 


करीब 1 :30 घंटे में हम जितना देख सकते थे देखे और जितना घूम सकते थे घूमे और ऐसे ही घुमते हुए देखा कि एक जगह कुछ लड़के थक कर बैठे हुए हैं। उनको बैठा देखकर एक सुरक्षाकर्मी उनके पास आकर बोलता है कि तुम लोग एक चक्कर भी नहीं लगा पाए और थक कर बैठ गए और एक वो बुढ़ऊ (बुजुर्ग) है जो हर दिन सुबह सुबह 5 चक्कर लगाता है।  उसकी इस बात पर मैंने उससे पूछ लिया कि आप किस बुढ़ऊ की बात कर हैं तो उसने जो जवाब दिया तो उसे सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ। उसका जवाब था कि वही बुढ़ऊ, अपना राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी।  उसकी ये बातें आज भी ये सोचने को मजबूर कर देती है कि आदमी चाहे कितना भी ऊँचे पद पर चला जाये पर वो सम्मान  हासिल नहीं कर सकता, सम्मान हासिल करने के लिए ऊँचे ओहदे नहीं ऊँचे आचार-विचार और व्यव्हार की जरूरत होती है। जैसे एक सुरक्षाकर्मी के दिल में एक राष्ट्रपति के प्रति कोई सम्मान नहीं था। 

चलिए अब आगे चलते हैं।  करीब 11 बजे हम वापस जाने के लिए गार्डन से बाहर निकलकर ऑटो का इंतज़ार कर रहे थे इतने में ही ऑफिस के एक सहकर्मी नरेंद्र जी सपरिवार दिख गए। नरेंद्र जी भी पत्नी और बेटी के साथ मुग़ल गार्डन देखने आये थे और अब वो भी वापस जा रहे थे।  मिलते ही सबसे पहला सवाल उन्होंने जो किया वो यही था कि ब्लॉग पर डालने के लिए फोटो लिए या नहीं।  मैंने उनको मोबाइल नहीं लाने की बात बताई जिस पर उन्होंने कहा कि मैंने बहुत सारे फोटो लिए हैं आप बेफिक्र होकर लिखिए फोटो हम देंगे और अपने इस पोस्ट में मैं जो भी फोटो डाला हूँ वो नरेंद्र जी का दिया हुआ है। उनके इस कार्य के लिए हम उनके आभारी हैं।  

अब हम आपसे विदा लेते है और जल्दी ही अपने अगले पोस्ट के साथ आपके समक्ष आऊंगा इसलिए तब तक आज्ञा दीजिये।  जो भी गलती हो या जो भी सुधर की गुंजाईश हो वो कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

धन्यवाद। 


आइए अब कुछ फोटो देख लेते हैं :



फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

फोटो नरेंद्र कुमार के सौजन्य से

नरेंद्र जी और उनकी पत्नी

21 comments:

  1. मुगल गार्डन की जानकारी देती बढ़िया पोस्ट आपकी... पहले हमे लगा की फोटो देखने को ही न मिलेंगे...पर नरेन्द्र भाई जी का धन्यवाद

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    1. जी हाँ धन्यवाद के पात्र तो नरेंद्र जी ही हैं, अगर वो नहीं होते तो मुझे फोटो नहीं मिलती और मैं लिखता नहीं।

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  2. जितना सुंदर विवरण उतने ही सुंदर चित्र।मुगल गार्डन से रूबरू कराने के लिए आपका आभार।हम दिल्ली के इतने नज़दीक होकर भी इतना नहीं घूम पाये।बहुत शानदार लेख।

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    1. सुमधुर धन्यवाद रुपेश जी,कभी आइए साथ साथ घूमेंगे

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  3. बहुत ही शानदार पोस्ट....और धन्यवाद नरेंद्र भाई का

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    1. जी प्रतीक भाई जी, नरेंद्र जी के सहयोग के बिना ये पोस्ट मैं लिख नहीं पाता

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  4. बहुत बढिया फोटो और वृत्तांत

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    1. सुमधुर धन्यवाद अनिल जी

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  5. सुन्दर वृत्तांत और खूबसूरत चित्र। ऐसे ही अचानक बने प्लान यादगार होते हैं।कैसे एक विज्ञापन ने आपको आने की प्रेरणा दी और आपने इतनी सुन्दर यादें संजोयी। ऐसी यात्रायें मुझे पसंद आती हैं जो अचानक हो जाती हैं। आपके साथ हमने भी मुग़ल गार्डन का भ्रमण कर लिया।

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    1. आपने आपने कीमती समय निकलकर इस पोस्ट को पढ़ा बहुत बहुत मीठा धन्यवाद। जी हाँ अचानक से बने प्लान यादगार रहते हैं और इस प्लान के लिए मेरी कोई योजना बिलकुल ही नहीं थी, अख़बार पढ़ा और चल दिए।

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  6. मै आजतक मुगल गार्डन ना जा सका। अबकी बार हो ही आऊ सोच रहा हूं, बढिया लिखा। वह कर्मचारी राष्ट्रपति की इज्जत नही कर रहा है यह उसके परवरिश में कमी है बडो का आदर करना चाहिए। आपके फोटो बहुत सुंदर है नरेंद्र जी का धन्यवाद, लेकिन आपने फोटो पर उनका नाम नही लिखा। यह थोडा अजीब सा लगा।

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    1. फोटो पर नाम नहीं लिखने का कारण है कि नरेंद्र जी का ही कहना था कि फोटो मैंने आपको दिया है और मुझे नाम नहीं चाहिए , वो तो अपनी फोटो भी नहीं दे रहे थे, बहुत जोर डालकर उनसे उनकी फोटो ली और यहाँ दिया,

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  7. मुगल गार्डन में मोबाइल ले जाने की छूट देकर बहुत अच्छा काम किया गया है।
    मैं दो बार पहले भी यहाँ जा चुका हूँ लेकिन फोटो एक भी नहीं है। शुक्र रहा कि आपके दोस्त ने आपकी यह कमी पूर्ण कर दी।

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    1. जी भाई जी मैं भी दो बार जा चूका हूँ पर एक भी फोटो नहीं थी, नरेंद्र जी का धन्यवाद एक बार फिर से करता हूँ कि उनके कारण मुझे फोटो मिल सकी।

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  8. सुंदर विवरण सुंदर चित्र। मुगल गार्डन से रूबरू कराने के लिए आपका आभार।
    शानदार लेख।

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    1. शुक्ला जी धन्यवाद आपका जो आप मेरे ब्लॉग पर आये और आपने अपना कीमती समय देकर मेरे ब्लॉग को पढ़ा।

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  9. जो सफ़र की शुरुआत करते हैं, वो ही मंजिल को पार करते हैं, बस एक बार चलने का हौसला रखिये, आप जैसे मुसाफिरों का तो रास्ते भी इंतज़ार करते हैं राही चलता जा ... मंजिल मिलेगी जरूर

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    1. एक बार पुनः धन्यवाद

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  10. बहुत बढ़िया सैर कराई अभयानंद जी । मुग़ल गार्डन का थोड़ा इतिहास और फूलों की प्रजातियों के बारे में भी बताते तो और अच्छा लगता । रही बात सुरक्षा कर्मी द्वारा महामहिम को बुढ़ऊ कहने की बात तो वो युवा लोगों को उनकी उम्र में शारीरिक चुस्ती-फुर्ती बताने के लिए कहा होगा ।

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  11. धन्यवाद मुकेश जी, एक बार मुग़ल गार्डन का थोड़ा विवरण और फूलों के बारे में भी लिखा पर गलती से वो पोस्ट डिलीट हो गया, दुबारा लिखा हूँ सो कुछ कमियां रह गई है

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